
त्वचा संबंधी समस्याएँ और देखभाल
शायद ही कोई व्यक्ति हो जो सुंदर दिखना पसंद न करता हो। नारी तो खासकर कोई भी ऐसी न होगी जो अपने सौंदर्य के प्रति लापरवाह रहती हो। मौसम के अनुसार सौंदर्य समस्याएँ भी बदलती रहती हैं। यहां प्रस्तुत हैं कुछ ग्रीष्मकालीन सौंदर्य समस्याएं एवं समाधान।
गर्मियों में पसीने का अधिक आना, त्वचा पर जलन वाले दाने होना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, मुंहासों का अधिक होना, पित्त निकलना, त्वचा का दुर्गन्ध युक्त होना, बालों में रूखापन तथा बालों में रूसी का बढ़ जाना इत्यादि प्रभाव मुख्यतः दृष्टिगोचर होते हैं।
त्वचा में उपस्थित मैलेनिन नामक रंजक द्रव्य आरंभ में त्वचा की रक्षा करता है, पर ज्यादा धूप की पराबैंगनी किरणों के द्वारा त्वचा अधिक प्रभावित होती है। गोरे व्यक्ति में मैलेनिन बनने की प्रक्रिया ज्यादा होती है जबकि काले व्यक्तियों में इसका असर कम होता है।
गर्मियों में धूप से बचने का सामान्य उपाय है धूप में जाते समय छाता या टोपी का उपयोग करें, धूप का चश्मा लगाएं व इस प्रकार के वस्त्र पहनें कि यथासंभव शरीर सूरज की किरणों से बचे।
ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य सुरक्षा हेतु विशेष उपचार है—शीतल जल से स्नान करना। साबुन शैम्पू आदि का प्रयोग रोज जरूरी नहीं। केवल साधारण जल से स्नान करना भी त्वचा को कांतिवर्धक बनाता है।
शरीर की दुर्गन्ध को दूर करने हेतु स्नान के लिए एक बाल्टी पानी में आधा नींबू का रस निचोड़ कर, उस पानी से स्नान करें।
अतिस्वेद आने पर मुल्तानी मिट्टी को गुलाब जल में मिलाकर लेप बना कर प्रयोग करें। हीट रेशेस होने पर दही में हल्दी मिलाकर स्नान से आधा घंटा पहले लेप करें। त्वचा पर चकत्ते होने पर खीरे का रस और गुलाब जल मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
पित्त होने पर दही में आटा मिलाकर लेप करें। खुजली और संक्रमण की स्थिति में नीम, तुलसी, धनिया, पुदीना और हल्दी का मिश्रण उपयोगी होता है।
अधिक तैलीय त्वचा में नींबू और खीरे का रस लाभकारी होता है, जबकि रूखी त्वचा के लिए तरबूज का रस उपयोगी है। सामान्य त्वचा के लिए श्वेत चंदन और गुलाब जल का लेप लाभ देता है।
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बालों की देखभाल और घरेलू उपचार
गर्मियों में बालों के रख-रखाव हेतु इन्हें स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक है। छोटे और तैलीय बालों को प्रतिदिन धोया जा सकता है, जबकि लंबे बालों को 1–2 दिन छोड़कर धोना चाहिए।
बालों में दुर्गन्ध आने पर गुलाबजल का प्रयोग करें। अधिक पसीना आने पर कपूर युक्त जल उपयोगी होता है। रूसी की समस्या में दही और मेथी बीज का लेप बहुत लाभकारी होता है।
बालों की रूक्षता से बचाव के लिए आँवले या नारियल तेल की मालिश करें। मेंहदी लगाने से सिर को ठंडक मिलती है और रूसी कम होती है। यह सिर दर्द और आंखों की जलन में भी राहत देता है।

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आहार, जीवनशैली और सम्पूर्ण सौंदर्य संरक्षण
ग्रीष्म ऋतु में सौंदर्य बनाए रखने के लिए खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। ताजे फल जैसे आम, पपीता, खीरा, ककड़ी, तरबूज और टमाटर का अधिक सेवन करें। नारियल पानी शरीर में स्फूर्ति और चमक बढ़ाता है।
शीतल पेय जैसे नींबू पानी, लस्सी, छाछ और अधिक मात्रा में जल का सेवन शरीर को ठंडा रखता है और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।
धूप से बचाव के लिए बाहर निकलते समय सनस्क्रीन, छाता और उचित कपड़ों का उपयोग करें। दिन में एक या दो बार स्नान करने से शरीर तरोताजा रहता है और त्वचा रोगों से बचाव होता है।
हाथों और पैरों की देखभाल भी जरूरी है। गुनगुने तेल मिले पानी में पैरों को डुबोकर रखने से थकान और कालापन दूर होता है। होंठों पर ग्लिसरीन या देशी घी लगाने से फटने की समस्या नहीं होती।
इस प्रकार, छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर गर्मियों में भी सौंदर्य और स्वास्थ्य को संतुलित रखा जा सकता है।
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