Thursday, September 17, 2026
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गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर्व

गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर्व
गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर्व

अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह प्रमुख हिंदू और जैन अनुष्ठानों को एक साथ लाती है, जिससे एक ऐसा दिन बनता है जो अपार आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है। हिंदुओं के लिए, यह भगवान विष्णु को उनके अनंत रूप में समर्पित है, जो शेषनाग पर योग निद्रा में विश्राम करते हैं। यह संतुलन और स्थिरता का प्रतीक है, जो भक्तों को सुख या दुःख से विचलित न होने और उच्च सत्य के प्रति सजग रहने की शिक्षा देता है।

शेषनाग को भी ईश्वर की शाश्वत सेवा के लिए सम्मानित किया जाता है। भक्त अनंत व्रत रखते हैं और धन, सद्भाव और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए अपनी बांह पर पवित्र अनंत दरम धागा बांधते हैं। इसके साथ ही, यह दिन भगवान गणेश से जुड़ाव का भी प्रतीक है, जिनका शरीर आत्मा के मंदिर का प्रतिनिधित्व करता है जो अंततः परमात्मा में विलीन हो जाती है। अनंत चतुर्दशी पर, उनकी प्रतिमाओं को जल निकायों में विसर्जित किया जाता है, जो ब्रह्मांडीय क्षेत्र में उनकी आध्यात्मिक वापसी का प्रतीक है और भक्तों को आत्मा की परम सत्ता की ओर वापसी की यात्रा की याद दिलाता है।

अनंत चतुर्दशी का पर्व छह सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु व लक्ष्मी की विशेष पूजा करने और अनंत रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। इस बार अनंत चतुर्दशी पर सुकर्मा और रवि योग के साथ धनिष्ठा व शतभिषा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि गणपति गणेश चतुर्थी पर विराजमान हुए थे और अनंत चर्तुदशी को मंगलकामना के साथ भक्तों से विदा लेते हैं।

अनंत चतुर्दशी व गणपति विसर्जन का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार दोनों ही पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष शनिवार को यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गणपति विसर्जन पर भक्त उत्साह के साथ गणपति बप्पा को विदा करते हैं।

अनंत चर्तुदशी को सुकर्मा, रवि योग के साथ धनिष्ठा व शतभिषा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। मंगलकारी योग में भगवान गणेश और विष्णु की पूजा करने से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं, साथ ही सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलेगी। भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। गणपति बप्पा की कृपा भी प्राप्त होती है।

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शेषनाग का नाम है अनंत

गणेश चतुर्थी के बाद अनंत चतुर्दशी आती है। अनंत चतुर्दशी का व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस दिन जहां गणेश मूर्ति का विसर्जन भक्त करते हैं, वहीं भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का विधान किया जाता है। भगवान विष्णु के सेवक भगवान शेषनाग का नाम अनंत है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है।

गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर्व

अनंत सूत्र का महत्व

इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के बाद बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है, जिसका विशेष महत्व होता है। इस दिन कच्चे धागे से बने 14 गांठ वाले धागे को बाजू में बांधने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है।

अनंत धारण करने के 14 दिन तक तामसिक भोजन नहीं करें 

ज्योतिषविद् की मानें तो इसे धारण करने के बाद 14 दिन तक तामसिक भोजन नहीं करते हैं, तभी इसका लाभ मिलता है। इस सूत्र को बांधने से व्यक्ति को सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। यदि जीवन में सबकुछ खो चुके हो तो अनंत चतुर्दशी पर भगवान अनंत की विधिवत पूजा करके यह धागा अवश्य बांधें और नियमों का पालन करें तो फिर से सब कुछ प्राप्त होता है।

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अनंत चर्तुदशी की कथा

कौंडिल्य ऋषि ने इस धागे को अपनी पत्नी के बाजू में बंधा देखा तो इसे जादू टोना मानकर उनके बाजू से निकालकर इसे जला दिया था। इससे ऋषि को भारी दु:खों का सामना करना पड़ा था। भूल का पता चलने पर उन्होंने भगवान अनंत की 14 वर्षों तक तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने फिर से उन्हें सुखी और धनपति बना दिया था। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के दिन भी इस व्रत के पश्चात फिरे थे। भगवान श्रीकृष्ण से पांडवों ने जुए में अपना राजपाट हार जाने के बाद पूछा था कि दोबारा राजपाट प्राप्त हो और इस कष्ट से छुटकारा मिले, इसका उपाय बताएं तो श्रीकृष्ण ने उन्हें परिवार सहित अनंत चतुर्दशी का व्रत बताया था।

पुरोहित पंडित जयराम शुक्ल कहते हैं कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।

गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर्व

गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी

इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी तिथि को गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। भक्तगण भगवान गणेश को विधिवत विदाई देकर घर में सुख-समृद्धि और विघ्नों की समाप्ति की प्रार्थना करते हैं। इस कारण अनंत चतुर्दशी का पर्व विष्णु और गणेश दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर बन जाता है।

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— सारिका असाटी

 

 

 

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