
इस बार भाद्रपद की एक तिथि आस्था के दो रंगों से आलोकित होगी। एक ओर सुहाग और अटूट संकल्प का निर्जला तप होगा, तो दूसरी ओर विघ्नहर्ता गणपति के मंगल आगमन की उमंग। 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएगी। तीन प्रमुख तीज पर्वों में सबसे कठिन माने जाने वाले हरतालिका के निर्जला व्रत के साथ घर-घर गणपति की स्थापना होगी। शिव-पार्वती की आराधना और गणपति वंदना का यह संयोग इस बार पर्व की आभा को और विशेष बना रहा है।
दोपहर व्यापिनी चतुर्थी में 14 को स्थापना
तृतीया तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो अगले दिन 15 सितंबर सुबह 7:45 बजे तक रहेगी। 14 तारीख को उदया तिथि में तृतीया होने से हरतालिका तीज व्रत इसी दिन मनाया जाएगा। इसी प्रकार भगवान गणेश का जन्म दोपहर में माना गया है, इसी दिन दोपहर के समय चतुर्थी तिथि रहेगी, इसलिए गणेश उत्सव की शुरुआत इसी से होगी। अगले दिन उदया समय में तो चतुर्थी रहेगी, लेकिन दोपहर में पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसके पहले 2023 में भी इस तरह की स्थिति बनी थी। तब कई लोगों ने चतुर्थी तिथि दो दिन 18 और 19 को मानी थी।

ऐसे करें गणेशजी की पूजा (Ganesh Chaturthi Puja)
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
गणपति की मूर्ति की जहां स्थापना हुई है उसके पास तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर रखें। कलश गणपित के दांई ओर होना चाहिए। इस कलश के नीचे चावल या अक्षत रखें और इसपर मोती अवश्य बांधें। गणपति के बांई तरफ चावल के ऊपर घी का दिया अवश्य जलाएं। पूजा और माला जपने का समय एक रखेंगे तो मनचाहा लाभ होगा। इसके बाद भगवान की आरती करें।
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कई शुभ योगों का रहेगा संयोग
इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एकसाथ रहेगी। साथ ही कई शुभ संयोग इस दिन रहेंगे, जो इसे और अधिक शुभता प्रदान करेंगे। इस बार यह दोनों पर्व सोमवार के दिन रहेंगे। यह दिन भगवान भोलेनाथ का प्रिय दिन होता है। साथ ही हरतालिका व्रत में शिव, पार्वती की आराधना की जाती है। चित्रा नक्षत्र का संयोग रहेगा। इस लिहाज से यह दिन अत्यंत शुभकारी होगा।
कब-कब हरतालिका, गणेश चतुर्थी साथ
18 सितंबर 2023
1 सितंबर 2011
17 सितंबर 2004

तीनों तीज में सबसे कठिन है आस्था की यह परीक्षा
हरियाली, कजरी और हरतालिका, तीनों तीज पर्वों की जड़ें मां पार्वती और भगवान शिव की भक्ति में हैं। लेकिन हरतालिका का स्वरूप सबसे कठोर माना गया है। इसमें दिन और रात तक निर्जला व्रत रखने की परंपरा है। जल की एक बूंद ग्रहण किए बिना किया जाने वाला यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और संकल्प की साधना माना जाता है। विवाहित महिलाएं दांपत्य की मंगलकामना और परिवार के सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी युवतियां भगवान शिव जैसा योग्य वर पाने की प्रार्थना करती हैं।
प्रदोष वेला में शिव-पार्वती की आराधना
हरतालिका तीज के पूजन के लिए सुबह 6.05 से 7.06 बजे तक का समय शुभ रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.32 से 5.19 बजे तक रहेगा। हालांकि भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा के लिए प्रदोष काल को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। 14 सितंबर को प्रदोष काल शाम 6.28 से रात 8.47 बजे तक रहेगा। शाम ढलने के साथ जब मंदिरों और घरों में दीप प्रज्ज्वलित होंगे, तब शिव-पार्वती की आराधना के स्वर वातावरण को भक्तिमय करेंगे। इसी वेला में सुहागिनें और व्रती महिलाएं अपने आराध्य के समक्ष श्रद्धा के साथ मनोकामनाएं अर्पित करेंगी।
सखी ले गई वन, तपस्या से पाया शिव का वरदान
हरतालिका के पीछे मां पार्वती की अटूट साधना की कथा है। मान्यता है कि मां पार्वती भगवान शिव को पति रूप में वरण करना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता राजा हिमवान ने उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अपनी पुत्री के मन की पीड़ा जानकर उनकी सखी उन्हें वन में ले गईं। वहीं एकांत वन में मां पार्वती ने सांसारिक मोह से दूर भगवान शिव को पाने का संकल्प लिया। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने रेत और मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर कठोर तप किया और पूरी रात भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं। उनकी अनन्य भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और मां पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी प्रसंग की स्मृति में हरतालिका का व्रत श्रद्धा और संकल्प के साथ किया जाता है।
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एक दिन, दो पर्वों की दिव्य छटा
- हरतालिका तीज शिव-पार्वती के प्रेम, तप और अटूट समर्पण का पर्व है, तो गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता के मंगल आगमन का उत्सव।
- इस बार दोनों पर्व एक ही दिन होने से आस्था का वातावरण और अधिक विशेष होगा।
- सुबह से जहां व्रत और पूजन की तैयारियां होंगी, वहीं घरों और पंडालों में गणपति स्थापना की रौनक दिखाई देगी।
- कहीं शिव-पार्वती की आराधना होगी, तो कहीं गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजेंगे।
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