Tuesday, October 13, 2026
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कामकाजी दंपतियों में बढ़ती दूरी

 

कामकाजी दंपतियों में बढ़ती दूरी
कामकाजी दंपतियों में बढ़ती दूरी

महानगरों में कामकाजी दंपतियों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है। कुछ साल पहले तक डबल इनकम, नो किड्स की चर्चा थी, अब नई चर्चा है – डबल इनकम पर एक-दूसरे के लिए समय नहीं। नवविवाहित जोड़े करियर में इतने व्यस्त हैं कि दांपत्य जीवन के लिए समय और ऊर्जा दोनों कम पड़ रही है।

कॉर्पोरेट सेक्टर में देर रात तक काम, टारगेट का दबाव और भविष्य को सुरक्षित करने की चिंता का असर सीधे वैवाहिक जीवन पर दिख रहा है। कई जोड़े साथ बैठकर नाश्ता करने और सुकून से बात करने तक का समय नहीं निकाल पाते।

बड़े शहरों में अधिकांश दंपति किराए के छोटे घरों में रहते हैं। जगह की कमी, ऑफिस आने-जाने में 2-3 घंटे लगना और आर्थिक दबाव के बीच आपसी संवाद और एकांत दोनों घट रहा है। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी के बीच पति-पत्नी के बीच की सहजता कम हो रही है।

कुछ निजी सर्वेक्षणों में यह प्रवृत्ति सामने आई है कि नियमित दांपत्य संबंध रखने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या में कमी हुई है। हालांकि यह कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है, पर यह संकेत देता है कि शहरी जीवनशैली का असर निजी जीवन पर पड़ रहा है।

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कामकाजी दंपतियों में बढ़ती दूरी

  • काम का बढ़ता दबाव

चिकित्सकों के अनुसार इसके पीछे केवल काम का बोझ नहीं है। लगातार तनाव, नींद पूरी न होना, अनियमित खानपान, धूम्रपान और शराब का सेवन हार्मोन संतुलन को प्रभावित करता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसी जीवनशैली जनित बीमारियां भी वैवाहिक स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।

कई बार जानकारी की कमी और संकोच के कारण भी पति-पत्नी खुलकर बात नहीं कर पाते। महिलाओं में प्रसव के बाद शरीर में बदलाव को लेकर चिंता, तो पुरुषों में काम के दबाव से उपजी थकान एक बड़ी वजह बन रही है। चिकित्सकों का मानना है कि कॉर्पोरेट में काम करने वाले लगभग आधे जोड़े किसी न किसी तरह के शारीरिक या मानसिक तनाव की शिकायत करते हैं।

  • रिश्तों पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका समाधान जीवनशैली में संतुलन से ही निकलेगा। आय और करियर जरूरी है, पर उसके लिए नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और आपसी संवाद को नजरअंदाज करना लंबे समय में ठीक नहीं है।

काम के घंटे तय करना, सप्ताह में एक दिन पूरी तरह परिवार के लिए रखना, स्क्रीन टाइम कम करना और जरूरत होने पर चिकित्सक या काउंसलर से सलाह लेना – ये छोटे कदम वैवाहिक जीवन में बड़ी दूरी को कम कर सकते हैं। आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की नींव है।

यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो इसे अधिक से अधिक लोगों के साथ शेयर करें और अपने विचार व सुझाव कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

— सारिका असाटी

 

 

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