
वॉकिंग शारीरिक रूप से एक्टिव रहने के सबसे आसान तरीकों में से एक है, लेकिन “लिम्फैटिक वॉकिंग” नाम का एक नया वेलनेस ट्रेंड ऑनलाइन चर्चा में है। आम तौर पर, इसका मतलब है धीरे-धीरे और सोच-समझकर चलना, साथ ही हल्की मूवमेंट, लयबद्ध तरीके से सांस लेना, पोस्चर बदलना या ऐसी एक्सरसाइज करना जिनसे लिम्फैटिक सर्कुलेशन (लसीका का संचार) बेहतर हो। डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह (एचओडी – फिजियोथेरेपी विभाग, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली) कहते हैं कि यह आइडिया अच्छा लगता है, लेकिन क्या लिम्फैटिक वॉकिंग असल में सामान्य वॉकिंग से बेहतर है? इसको आगे बताया गया है।
लिम्फैटिक वॉकिंग क्या है?
“लिम्फैटिक वॉकिंग” की कोई एक तय मेडिकल परिभाषा नहीं है। इस शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर ऐसी हल्की और लयबद्ध मूवमेंट के लिए किया जाता है जो लिम्फ के बहाव में मदद करती हैं। ब्लड सर्कुलेशन के उलट, लिम्फैटिक सिस्टम में दिल जैसा कोई सेंट्रल पंप नहीं होता। मांसपेशियों की मूवमेंट, सांस लेने के दौरान दबाव में बदलाव और शरीर की मूवमेंट – ये सभी लिम्फैटिक वेसल्स (लसीका वाहिकाओं) के जरिए लिम्फ की मूवमेंट में मदद करते हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ शारीरिक रूप से एक्टिव रहने, जिसमें वॉकिंग भी शामिल है, से लिम्फैटिक सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है।

शरीर में लिम्फैटिक सिस्टम क्या काम करता है?
लिम्फैटिक सिस्टम शरीर के इम्यून और फ्लूइड-मैनेजमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह टिशू से अतिरिक्त फ्लूइड इकट्ठा करता है और उसे ब्लडस्ट्रीम में वापस भेजता है, साथ ही इम्यून सेल्स को भी पहुंचाता है और लिम्फ नोड्स के जरिए संभावित हानिकारक पदार्थों को फिल्टर करने में मदद करता है। जब लिम्फ ड्रेनेज में रुकावट आती है, तो टिशू में फ्लूइड जमा हो सकता है, जिससे सूजन आ जाती है जिसे लिम्फेडेमा कहते हैं।
क्या वॉकिंग लिम्फैटिक सर्कुलेशन में मदद करती है?
शारीरिक गतिविधि के दौरान मांसपेशियों के सिकुड़ने से लिम्फ के ट्रांसपोर्ट में मदद मिल सकती है। लिम्फेडेमा पर हुई रिसर्च से पता चलता है कि एक्सरसाइज के लक्षणों, शारीरिक कामकाज और कुछ मामलों में अंगों के आकार पर अच्छे असर पड़ सकते हैं, हालांकि सबूतों की निश्चितता अलग-अलग हो सकती है। वॉकिंग खास तौर पर प्रैक्टिकल है क्योंकि यह आसान है, कई लोगों के लिए कम-इम्पैक्ट वाली है और इसे रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है। अहम बात यह है कि इन फायदों को पाने के लिए आपको किसी खास “लिम्फैटिक वॉकिंग” तकनीक की जरूरत नहीं है।
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लिम्फैटिक वॉकिंग और सामान्य वॉकिंग में क्या अंतर है?
सामान्य वॉकिंग आम तौर पर कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस, शारीरिक गतिविधि, सहनशक्ति और कुल मिलाकर सेहत पर ध्यान देती है। लिम्फैटिक वॉकिंग में आम तौर पर धीमी, नियंत्रित मूवमेंट, आराम से सांस लेने और मांसपेशियों की लयबद्ध गतिविधि पर जोर दिया जाता है। कुछ रूटीन में एंकल पंप, हल्की स्ट्रेचिंग, हाथों की मूवमेंट या पोस्चर एक्सरसाइज भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए, इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि “लिम्फैटिक वॉकिंग” नाम की वजह से यह आम वॉकिंग के मुकाबले सेहत को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाती है। इसके बजाय, एक्टिविटी की तेजी और समय का चुनाव व्यक्ति की फिटनेस, सेहत की स्थिति और लक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
क्या इससे सूजन (फ्लूइड रिटेंशन) की समस्या कम हो सकती है?
शारीरिक एक्टिविटी से फ्लूइड के सर्कुलेशन में मदद मिल सकती है, और लिम्फेडेमा के इलाज में एक्सरसाइज को शामिल किया जाता है। रिसर्च से पता चलता है कि एक्सरसाइज का अंगों के साइज और लक्षणों पर थोड़ा सकारात्मक असर पड़ सकता है, हालांकि इसके सबूत सीमित और अलग-अलग तरह के हैं। लेकिन, शरीर में आम तौर पर पानी रुकना लिम्फेडेमा जैसा नहीं है। सूजन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, दवाएं, नसों की समस्या, दिल या किडनी की बीमारी और अन्य मेडिकल समस्याएं। इसलिए, लगातार रहने वाली, बिना वजह या शरीर के एक तरफ होने वाली सूजन का इलाज सिर्फ वॉकिंग से नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। जिन लोगों को पहले से लिम्फेडेमा है, उन्हें एक खास एक्सरसाइज प्रोग्राम से फायदा हो सकता है, जिसमें कभी-कभी कम्प्रेशन और लिम्फेडेमा के इलाज के दूसरे तरीके भी शामिल हो सकते हैं।

क्या वजन घटाने के लिए लिम्फैटिक वॉकिंग ज्यादा असरदार है?
इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि “लिम्फैटिक वॉकिंग” से आम वॉकिंग के मुकाबले तेजी से वजन घटता है। वजन का मैनेजमेंट मुख्य रूप से कितनी एनर्जी ली और कितनी खर्च की, इसके साथ-साथ डाइट, नींद, मसल्स मास, एक्टिविटी का लेवल और दूसरे व्यक्तिगत कारणों पर निर्भर करता है। बहुत धीमी वॉकिंग के मुकाबले तेज या ज्यादा देर तक की आम वॉकिंग से कार्डियोवैस्कुलर और एनर्जी खर्च करने में अधिक मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, जो लोग एक्टिव नहीं हैं, बीमारी से ठीक हो रहे हैं या ज्यादा तेजी वाली एक्सरसाइज नहीं कर सकते, उनके लिए हल्की वॉकिंग एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है।
आखिरकार, सबसे अच्छा वॉकिंग रूटीन वही है जिसे लगातार और सुरक्षित तरीके से किया जा सके। इसलिए, लिम्फैटिक वॉकिंग को आम वॉकिंग से बेहतर मानने के बजाय, इसे मूवमेंट के एक ऐसे तरीके के तौर पर देखना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है जिसमें ऐसे सिद्धांत शामिल हों जो लिम्फैटिक फ्लो में मदद कर सकें। नियमित शारीरिक एक्टिविटी ज्यादा जरूरी है।
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