Tuesday, July 7, 2026
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भारतीय चिकित्सा संघ/Indian Medical Association

भारतीय चिकित्सा संघ/Indian Medical Association
भारतीय चिकित्सा संघ/Indian Medical Association

हर साल 1 जुलाई को भारत में नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctors’ Day) मनाया जाता है। यह दिन उन डॉक्टरों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जो दिन-रात मरीजों की जान बचाने और लोगों को स्वस्थ रखने के लिए काम करते हैं। डॉक्टर सिर्फ बीमारी का इलाज ही नहीं करते, बल्कि कई बार अपनी जान की परवाह किए बिना समाज की सेवा भी करते हैं। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे का दिन देश के महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय, जिन्हें डॉ. बी.सी. रॉय कहा जाता था, उनकी जयंती और पुण्यतिथि दोनों के रूप में भी खास है। उनका जन्म और निधन दोनों 1 जुलाई को ही हुआ था। यही वजह है कि उनके सम्मान में हर साल यह दिन मनाया जाता है।

भारत में क्यों मनाया जाता है नेशनल डॉक्टर्स डे?

भारत में नेशनल डॉक्टर्स डे डॉक्टरों की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और समाज के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि डॉक्टर केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसी भी आपदा, महामारी या आपात स्थिति में सबसे पहले लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं। भारतीय चिकित्सा संघ (Indian Medical Association-IMA) हर साल इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है और डॉक्टरों को सम्मानित करता है।

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कौन थे डॉ. बी.सी. रॉय?

डॉ. बी.सी. रॉय का पूरा नाम डॉ. बिधान चंद्र रॉय था। वह केवल एक प्रसिद्ध डॉक्टर ही नहीं, बल्कि समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और सफल राजनेता भी थे। वह पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने और उन्होंने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी के वे बेहद करीबी थे और उनके निजी चिकित्सक भी रहे। बताया जाता है कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी उन्होंने महात्मा गांधी का इलाज किया था।

पटना में हुआ जन्म, बनाई अलग पहचान

डॉ. बी.सी. रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद चिकित्सा क्षेत्र में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम देश के सबसे सम्मानित डॉक्टरों में शामिल हो गया।

शिक्षा और समाज सेवा में भी निभाई बड़ी भूमिका

डॉ. रॉय केवल डॉक्टर नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद भी थे। जब वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे, तब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी हवाई हमलों का खतरा बना हुआ था। उस समय उन्होंने छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मजबूत बंकर बनवाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनकी जान बचाई जा सके। वे कई सामाजिक और राहत कार्यों से भी जुड़े रहे। चिकित्सा और समाज सेवा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 1944 में डॉक्टरेट ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित किया गया।

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1961 में मिला भारत रत्न

देश के लिए उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1961 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया, जो देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। एक रोचक संयोग यह भी है कि 1 जुलाई 1962 को, यानी अपने जन्मदिन के दिन ही उनका निधन हुआ। डॉ. बी.सी. रॉय ने केवल चिकित्सा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शहरी विकास में भी बड़ा योगदान दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर, कल्याणी, बिधाननगर (सॉल्ट लेक), अशोकनगर और हावड़ा जैसे शहरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत में कब शुरू हुआ नेशनल डॉक्टर्स डे?

भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) की सिफारिश पर भारत सरकार ने 1991 में पहली बार राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत की। इसका उद्देश्य डॉ. बी.सी. रॉय के योगदान को सम्मान देना और देशभर के डॉक्टरों की सेवाओं को पहचान देना था। डॉ. बी.सी. रॉय भारत में कई प्रमुख मेडिकल संस्थानों के विकास से जुड़े रहे। उन्होंने भारतीय चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए उनके प्रयास आज भी याद किए जाते हैं।

दुनिया में कैसे शुरू हुआ डॉक्टर्स डे?

डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत सबसे पहले 1933 में अमेरिका में हुई थी। डॉ. चार्ल्स बी. आलमंड की पत्नी यूडोरा ब्राउन आलमंड ने डॉक्टरों के सम्मान में इस दिन की शुरुआत की। इसके लिए 30 मार्च की तारीख चुनी गई, क्योंकि इसी दिन 1842 में डॉ. क्रॉफर्ड लॉन्ग ने पहली बार सर्जरी में जनरल एनेस्थीसिया का सफल इस्तेमाल किया था। बाद में 1991 में अमेरिका ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय मान्यता दी।

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दूसरे देशों में कब मनाया जाता है डॉक्टर्स डे?

दुनिया के अलग-अलग देशों में डॉक्टर दिवस अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में 30 मार्च को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। कनाडा में 18 अक्टूबर को सेंट ल्यूक डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। चीन में 19 अगस्त को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा कई देशों में मई के तीसरे रविवार को महिला डॉक्टर दिवस और एम्पैथी डॉक्टर्स डे जैसे विशेष आयोजन भी किए जाते हैं।

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क्या है National Doctors’ Day 2026 की थीम?

इस साल नेशनल डॉक्टर्स डे 2026 की थीम है— Behind the Mask: Who Heals the Healers? यानी “बिहाइंड द मास्क: इलाज करने वालों का इलाज कौन करता है?”। इस थीम का मकसद लोगों का ध्यान डॉक्टरों की मानसिक और भावनात्मक सेहत की ओर ले जाना है। डॉक्टर हर दिन मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन लंबे समय तक काम करना, लगातार तनाव, मानसिक दबाव और भावनात्मक चुनौतियां उनकी जिंदगी का भी हिस्सा होती हैं। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि डॉक्टरों को भी बेहतर सपोर्ट सिस्टम, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और समाज के सहयोग की जरूरत होती है।

यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। लेख पसंद आए तो इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। अपने विचार और सुझाव कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें।

 

सारिका असाटी
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