
अमेरिका इस साल 4 जुलाई को अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। 250 साल पहले 1776 में इसी तारीख को उत्तरी अमेरिकी की 13 ब्रिटिश कॉलोनियों ने ब्रिटेन से अलग होने का ऐलान किया और ‘आजादी की घोषणा’ (Declaration of Independence) को अपनाया। यह घोषणापत्र एक अहम दस्तावेज था जिसने आजाद देश के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका की नींव रखी। यह आजादी एक लंबी लड़ाई का परिणाम थी, जो इन कॉलोनियों ने मिलकर लड़ी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिकी की आजादी की आखिरी लड़ाई भारत की जमीन पर लड़ी गई थी।
भारत से जुड़ी अमेरिका की आजादी की कहानी
अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन कई तरह से भारत की कहानी से जुड़ा हुआ था। इस क्रांति की नींव 1773 की बोस्टन टी पार्टी से पड़ी, जो चाय कानून के खिलाफ एक प्रदर्शन था। इस कानून के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को औपनिवेशनिक चाय पर सब्सिडी दी गई थी।
ब्रिटिश सेना अभी भी फिलाडेल्फिया से होने वाली शिपिंग की राह में बाधा डाल रही थी। इन हमलों का मुकाबला करने के लिए 1782 में हैदर अली नाम का एक जहाज फिलाडेल्फिया से निकला। तोपों से लैस इस जहाज को सात जहाजों को फिलाडेल्फिया से सुरक्षित ले जाने का जिम्मा सौंपा गया था। रवाना होते ही उसका सामना तीन ब्रिटिश युद्धपोतों से हुआ। इस जहाज ने बिना डरे मुकाबला किया और एक ब्रिटिश जहाज पर कब्जा कर लिया। दूसरे जहाज को जमीन पर फंसने के लिए मजबूर किया और तीसरा भाग गया।
भारतीय सुल्तान के नाम पर जहाज का नाम
हैदर अली का नाम मैसूर के तत्कालीन सुल्तान हैदर अली के सम्मान में रखा गया था। जब अमेरिका आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, उसी समय भारत, यूरोप की औपनिवेशिक ताकतों के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ था। हैदर अली उस समय भारत में फ्रांसीसी मदद से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के छक्के छुड़ा रहे थे। मैसूर के संघर्षों ने अमेरिकी लोगों को प्रभावित किया।

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अमेरिका ने फेर लिया मैसूर से मुंह
लेकिन आजादी के बाद मैसूर के लिए अमेरिकियों का प्रेम वैसा नहीं रहा। मैसूर ब्रिटेन के साथ संघर्ष में लगा था लेकिन उसी समय 1783 में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच संधि हो गई। इस संधि के बाद फ्रांस ने मैसूर को सीधी मदद देना बंद कर दिया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अमेरिकी क्रांति की आखिरी लड़ाई 1783 में कोरोमंडल के तट पर हुई थी। अंग्रेजों ने कुड्डालोर के एक किले को घेर लिया, जिस पर फ्रांस और मैसूर की संयुक्त सेना का कब्जा था। लेकिन इसी बीच शांति समझौते की खबर मिली और घेराबंदी खत्म कर दी गई। यह भारतीय उपमहाद्वीप से फ्रांसीसियों की वापसी थी। वहीं, ब्रिटेन ने अमेरिका को छोड़कर अपने उपनिवेशों को सुरक्षित कर लिया था।
मुख्य कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल में हुआ, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्र को संबोधित किया। बारिश और आंधी-तूफान के कारण कार्यक्रम में देरी हुई, लेकिन मौसम साफ होने के बाद समारोह शुरू हुआ।
अपने संबोधन में ट्रम्प ने कम्युनिज्म पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हम अपने देश में कम्युनिस्टों को नहीं चाहते। कम्युनिज्म हमेशा हारता आया है और आगे भी हारेगा। यह अमेरिकी व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है।” ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों ने दुनिया भर में कम्युनिज्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, ताकि यह विचारधारा कभी अमेरिका के भीतर जगह न बना सके।
भाषण के बाद नेशनल मॉल में करीब 40 मिनट तक रिकॉर्ड आतिशबाजी हुई। इस दौरान 8.5 लाख से ज्यादा फायरवर्क्स हुए। व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा स्वतंत्रता दिवस फायरवर्क शो बताया।
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