Thursday, March 26, 2026
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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day

भारत में हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। यह दिवस ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा आयोजित किया जाता है, जो विद्युत मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। इसका उद्देश्य लागत-कुशल ऊर्जा उत्पादन और संसाधन संरक्षण में भारत की उत्कृष्ट उपलब्धियों को प्रदर्शित करना है। इस दिन जलवायु परिवर्तन के शमन के मुख्य लक्ष्य के रूप में समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की जाती है। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के  और उनके कार्यों का अनुसरण करके अधिक जानकारीपूर्ण तरीकों से जुड़ें।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का उद्देश्य भारत में आम जनता को ऊर्जा बचाने के महत्व के बारे में जागरूक करना है। लोगों को नई कार्य योजनाओं और उपायों की जानकारी भी दी जाती है। ऊर्जा की बर्बादी को कम करने और संसाधनों के संरक्षण में जनता की भूमिका के बारे में भी बताया जाता है। संक्षेप में, इस दिवस का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा का उपयोग कम करना और लोगों को इसका कुशलतापूर्वक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।  केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अधीन गठित ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) 1991 से प्रतिवर्ष 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के समारोह का नेतृत्व कर रहा है। भारत सरकार के अधीन एक संवैधानिक निकाय, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ऊर्जा की अत्यधिक खपत को कम करने के लिए रणनीतियों और नीतियों के विकास और कार्यान्वयन में सहायता करता है। समिति ने 2001 में ‘ऊर्जा संरक्षण अधिनियम’ को भी लागू किया।

अपने जागरूकता अभियान के अंतर्गत, ऊर्जा दक्षता में उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए देश के 56 उप-क्षेत्रों में इस दिन प्रतिवर्ष पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार कार्यक्रम बिजली संयंत्रों से लेकर होटलों और शॉपिंग मॉल तक, उद्योग, संस्थानों और प्रतिष्ठानों के प्रयासों की सराहना करता है। ऊर्जा संरक्षण विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी बीईई द्वारा पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

भारत के विकास क्षेत्र फल-फूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा की मांग में वृद्धि हो रही है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की संसाधन आवश्यकताएँ दोगुनी हो जाएँगी। बीईई ऊर्जा उपयोग के कुशल उपायों को अपनाने की वकालत करके इस मांग को कम करने में सहायक रणनीतियाँ और नीतियाँ विकसित करता है।

हर साल 14 दिसंबर को ऊर्जा दक्षता तथा संरक्षण में देश की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’ मनाया जाता है। इसका आयोजन ऊर्जा मंत्रालय से संबद्ध ऊर्जा दक्षता ब्यूरो करता है। ज्ञात हो, इस ब्यूरो ने वर्ष 2001 में देश में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम लागू किया था।

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day

जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ बढ़ रही ऊर्जा की खपत

दुनियाभर में पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है और उसी के अनुरूप ऊर्जा की खपत भी निरन्तर बढ़ रही है। दूसरी ओर जिस तेजी से ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, उससे भविष्य में परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के नष्ट होने की आशंका बढ़ने लगी है। अगर ऐसा होता है तो मानव सभ्यता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।

ऊर्जा स्रोतों को बचाने के लिए ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’ 

यही कारण है कि भविष्य में उपयोग हेतु ऊर्जा के स्रोतों को बचाने के लिए विश्व भर में ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान देते हुए इसके प्रतिस्थापन के लिए अन्य संसाधनों को विकसित करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

ऊर्जा के अपव्यय को कम करने, ऊर्जा बचाने और इसके संरक्षण के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए ही देश में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। यह दिवस प्रतिवर्ष एक खास विषय के साथ कुछ लक्ष्यों तथा उद्देश्यों को मद्देनजर रखते हुए लोगों के बीच इन्हें अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए मनाया जाता है।

ऊर्जा की बचत के लिए लोगों को किया जाता है प्रेरित 

वास्तव में इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग को न्यूनतम करते हुए लोगों को मानवता के सुखद भविष्य के लिए ऊर्जा की बचत के लिए प्रेरित करना ही है। इसी क्रम में विद्युत मंत्रालय द्वारा देश में ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान’ शुरू किया गया। यह एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान बन गया है।

ऊर्जा संरक्षण के लिए उठाए यह कदम 

देश में ऊर्जा संरक्षण तथा कुशलता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1977 में केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन का गठन किया गया था। ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा संरक्षण के महत्व के बारे में आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए वर्ष 2002 में एक अन्य संगठन ‘ऊर्जा दक्षता ब्यूरो’ स्थापित किया गया। ब्यूरो का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति छोटे-छोटे कदम उठाकर अपने घर अथवा कार्यालय में लाइट, पंखे, हीटर, कूलर, एसी तथा बिजली के अन्य किसी भी उपकरण के अनावश्यक उपयोग पर नियंत्रण करते हुए ऊर्जा की बचत कर सकता है।

बड़ी मात्रा में किया जा सकता है ऊर्जा संरक्षण 

इस संबंध में लेखक और स्वतंत्र टिप्पणीकार योगेश कुमार गोयल अपनी पुस्तक ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ में बताते हैं, मैंने विस्तार से उल्लेख किया है कि किस प्रकार छोटे-छोटे स्तर पर ऊर्जा संरक्षण के लिए कदम उठाकर भी प्रत्येक नागरिक देश के राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान में बहुत बड़ी मदद दे सकता है और इस प्रकार बड़ी मात्रा में ऊर्जा संरक्षण किया जा सकता है।

छोटे उपाय भी जरूरी

अगर ऐसे ही कुछ छोटे उपायों का उल्लेख किया जाए तो पुराने बल्बों के स्थान पर सीएफएल या एलईडी बल्बों का इस्तेमाल किया जाए। आई.एस.आई. चिह्नित विद्युत उपकरणों का ही उपयोग करें। यथासंभव दिन के समय सूर्य की रोशनी का अधिकतम उपयोग किया जाए और जरूरत न होने पर लाइटें, पंखे, कूलर, एसी, हीटर, गीजर इत्यादि विद्युत उपकरण बंद रखें। खाना पकाने के लिए बिजली के उपकरणों के बजाय सोलर कुकर और पानी गर्म करने के लिए बिजली के गीजर के बजाय सोलर वाटर हीटर के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day

भविष्य के लिए ऊर्जा बचाने में बनेंगे मददगार 

भवन निर्माण के समय प्लाट के चारों ओर वृक्ष लगाए जाएं तो प्रचंड गर्मी में भी भवन गर्म होने से बचेंगे और कूलर, एसी इत्यादि की जरूरत कम होगी। मकानों या कार्यालयों में दीवारों पर हल्के रंगों के प्रयोग से कम रोशनी वाले बल्बों से भी कमरे में पर्याप्त रोशनी हो सकती है। इससे न केवल ऊर्जा संरक्षण अभियान में सहभागी बनकर हम भविष्य के लिए ऊर्जा बचाने में मददगार बनेंगे बल्कि अपना बिजली बिल भी सीमित रख सकेंगे।

ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ कर्मचारियों की कार्यक्षमता में भी बढ़ोतरी  

सार्वजनिक स्थानों पर सौर लाइटों की व्यवस्था होनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कार्यस्थल पर दिन के समय प्राकृतिक रोशनी में कार्य करने वाले लोगों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है और ऊर्जा की खपत में अपेक्षित कमी आती है, वहीं तेज कृत्रिम रोशनी वाले स्थानों पर काम करने से कर्मियों में तनाव, सिरदर्द, रक्तचाप, थकान जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखी जाती हैं और उनकी कार्यकुशलता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऑफिस में यदि पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी का व्यवस्था हो तो इससे ऊर्जा संरक्षण होने के साथ-साथ कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

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सीमित प्राकृतिक संसाधनों में बिजली जैसी ऊर्जा की महत्वपूर्ण जरूरत

प्रतिवर्ष देश में हजारों गैलन पानी बर्बाद होता है, इसलिए ऊर्जा संरक्षण की बात करते समय जल की बर्बादी को रोकने पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना भी बेहद जरूरी है। न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के समक्ष बिजली जैसी ऊर्जा की महत्वपूर्ण जरूरतें पूरी करने के लिए सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं, साथ ही पर्यावरण असंतुलन और विस्थापन जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस/National Energy Conservation Day

पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा की जरूरतें पूरा करने में कारगर

ऐसी गंभीर समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा ऐसा बेहतरीन विकल्प है, जो पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में भी कारगर साबित होगा लेकिन ऊर्जा के संसाधन गैर-अक्षय हों या अक्षय, हमें अपने जीवन में ऊर्जा के महत्व को समझते हुए ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक होना ही होगा। देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि ऊर्जा चाहे किसी भी रूप में हो, वह उसे व्यर्थ में नष्ट न करे। अपने और आने वाली पीढ़ियों के सुखद भविष्य के लिए हमें अपने व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण की आदतों को शामिल करना ही होगा।

यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है लेख पसंद आये तो इसे ज़्यादा से ज्यादा शेयर करें। अपने विचार और सुझाव कमेंटबॉक्स में ज़रूर लिखे।

 

– सारिका असाटी

 

 

 

 

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