Monday, March 23, 2026
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पुत्रदा एकादशी का महत्व/Importance of Putrada Ekadashi

पुत्रदा एकादशी का महत्व/Importance of Putrada Ekadashi
पुत्रदा एकादशी का महत्व/Importance of Putrada Ekadashi

हिंदू धर्म में सभी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि, इनमें प्रत्येक महीने की ग्यारहवीं तिथि अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। मान्यता है कि, इस दिन एकादशी व्रत किया जाता है, जो सृष्टि के पालनहार विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना, दान-दक्षिणा या भजन-कीर्तन जैसे शुभ कार्य करने से प्रभु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके प्रभाव से घर से लेकर साधक के निजी जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

यही नहीं धन की माता लक्ष्मी जी भी अपनी असीम कृपा बरसाती हैं। वर्तमान में पौष महीना जारी है और इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। ऐसे में इस दिन कुछ सरल उपाय करने से प्रभु प्रसन्न हो सकते हैं। साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटें, विवाह मार्ग बाधाएं और करियर में अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। ऐसे में आइए इन उपायों को जानते हैं।

पुत्रदा एकादशी 2025

  • इस वर्ष पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी।
  • इस तिथि का समापन अगले दिन 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे होगा।
  • इसलिए 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। यह सरल उपाय करियर में तरक्की, प्रमोशन के योग और व्यापार विस्तार की बाधाओं को दूर करता है। साथ ही मानसिक शांति भी बनी रहती हैं।

  • पुत्रदा एकादशी के दिन आप पान के पत्ते पर ‘ॐ विष्णवे नमः’ लिखकर विष्णु जी के चरणों में चढ़ाएं। यह शुभ होता है। मान्यता है कि, इस सरल उपाय से प्रभु प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पूजा के बाद इस पत्ते को आप अपनी तिजोरी में रख लें। इससे आर्थिक उन्नति भी होती हैं।

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एकादशी के दिन विष्णु जी को केले का भोग लगाएं। इसके बाद गाय को घी चुपड़ी हुई रोटी पर गुड़ रखकर खिला दें। मान्यता है कि, यह सरल उपाय संतान के जीवन में सुख-समृद्धि से लेकर उनकी खुशियों में वृद्धि करता है।

पुत्रदा एकादशी पर आप तीन तुलसी के पत्ते पर 11 बार ‘श्री’ का जाप करके भगवान विष्णु को अर्पित करें। इस इसके बाद शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर उनकी पूजा भी करें। यह सरल उपाय बरकत के योग का निर्माण करता है।

  • एकादशी पर आप पीपल के पेड़ के नीचे तेल का एक दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा करते हुए आप ‘ऊँ नमो नारायणाय नमः’ मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि, इससे भगवान विष्णु की कृपा मिलती हैं। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

पुत्रदा एकादशी का महत्व/Importance of Putrada Ekadashi

  • शास्त्रों में पुत्रदा एकादशी का उल्लेख

    पद्म पुराण और भविष्य पुराण में पुत्रदा एकादशी का विस्तृत वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का नाम स्वयं इसके फल को प्रकट करता है। पुत्रदा का अर्थ है पुत्र प्रदान करने वाली। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतानहीन दंपत्ति को भी संतान सुख प्राप्त हो सकता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नगरी में राजा सुकुमार और रानी शैव्या संतानहीन थे। अनेक वर्षों तक दुखी रहने के बाद उन्होंने पुत्रदा एकादशी का विधि पूर्वक व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें योग्य पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कथा के आधार पर इस एकादशी को संतान प्राप्ति का विशेष व्रत माना गया।

  • पुत्रदा एकादशी का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी केवल संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, शुद्ध आचरण और भक्ति की ओर प्रेरित करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि संतान केवल शारीरिक प्रयास से नहीं, बल्कि पुण्य कर्म और ईश्वरीय कृपा से भी प्राप्त होती है। एकादशी व्रत इसी पुण्य संचय का माध्यम है। इसके साथ ही यह व्रत परिवार, वंश और सामाजिक संतुलन के महत्व को भी दर्शाता है। प्राचीन काल में पुत्र को वंश परंपरा, पितृ ऋण और धार्मिक कर्तव्यों से जोड़ा जाता था, इसी कारण पुत्र प्राप्ति की कामना को धर्म से जोड़ा गया।

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  • पुत्रदा एकादशी के व्रत का फल

    शास्त्रों में बताया गया है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से संतान सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। माना जाता है कि जिन दंपत्तियों को संतान संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा होता है, उन्हें इस व्रत से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही यह व्रत परिवार में आपसी सद्भाव, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता लाता है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत पापों के प्रभाव को कम करता है और व्यक्ति के पूर्व जन्मों के दोषों के शमन में भी सहायक माना गया है।

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– सारिका असाटी

 

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