
अभी सावन महीने का शुक्ल पक्ष चल रहा है, इस पक्ष का पहला बड़ा व्रत 15 अगस्त को हरियाली तीज के रूप में किया जाएगा। हरियाली तीज महिलाओं के लिए खास व्रत-पर्व है। इस दिन भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा की जाती है। बारिश के मौसम में चारों ओर हरियाली छा गई है, पेड़-पौधों पर नई रौनक दिखाई दे रही है और प्रकृति सुंदरता निखर गई है। हर साल इस तिथि पर ऐसा ही नजारा रहता है, इसलिए इस व्रत का नाम हरियाली तीज पड़ा।
तृतीया तिथि की स्वामी देवी गौरी यानी माता पार्वती मानी गई हैं। इसी वजह से इस पर्व को गौरी तीज भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से देवी पार्वती की पूजा करती हैं।
हरियाली तीज क्यों है महिलाओं के लिए खास?
विवाह के बाद महिला के लिए पहला सावन विशेष महत्व रखता है। पुराने समय से ही नवविवाहित महिलाओं को सावन में मायके या ससुराल की ओर से नए कपड़े, गहने और श्रृंगार की वस्तुएं देने की परंपरा रही है।
हरियाली तीज के मौके पर महिलाएं सजती-संवरती हैं और इस दिन पारंपरिक रूप से हरे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पहले के समय में महिलाएं अपनी सहेलियों के साथ मिलकर सावन के गीत गाती थीं, झूले झूलती थीं और व्रत-पर्व का आनंद लेती थीं। आज भी कई जगहों पर इस परंपरा को उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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हरियाली तीज से जुड़ी मान्यताएं
हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करती हैं। माता पार्वती को सुहाग की चीजें, जैसे लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, कुमकुम, सिंदूर, बिंदी अर्पित करती हैं और भगवान शिव का भी पूजन करती हैं।
मान्यता है कि सावन महीने से शुरू करके माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तप करने के बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्या स्वीकार की। इसलिए हरियाली तीज को पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख से भी जोड़कर देखा जाता है।
हरियाली तीज का व्रत केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है। कुंवारी कन्याएं भी इस दिन माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि देवी की आराधना करने से कन्याओं को मनपसंद और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना पूरी हो सकती है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, परिवार में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं।
भगवान श्रीकृष्ण मंदिरों में भी सजते हैं हिंडोले
हरियाली तीज का संबंध केवल शिव-पार्वती की पूजा से ही नहीं है। इस तिथि पर कई कृष्ण मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह को सुंदर हिंडोले में झुलाया जाता है।
पुरुष भी रख सकते हैं हरियाली तीज का व्रत
हरियाली तीज को आमतौर पर महिलाओं के व्रत के रूप में जाना जाता है, लेकिन मान्यताओं के अनुसार पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं। जिन परिवारों में पति-पत्नी के बीच मतभेद या मनमुटाव रहता है, वे भी श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की पूजा कर सकते हैं।
मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। इसलिए यह पर्व पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने का संदेश भी देता है।
हरियाली तीज पर जरूर लगाएं पौधे
हरियाली तीज प्रकृति से जुड़ा पर्व है। इसलिए इस दिन घर के आसपास पौधे लगाना चाहिए, साथ ही इस पौधे के बड़े होने तक इसका ध्यान रखने का संकल्प लेना चाहिए।
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