Monday, April 20, 2026
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आदित्य धर फिल्म सफर/Aditya Dhar film Safar

आदित्य धर फिल्म सफर/Aditya Dhar film Safar
आदित्य धर फिल्म सफर/Aditya Dhar film Safar

आज कहानी उस सफ़र की है, जहां क्रिकेट की पिच पर गेंद भले ही स्पिन न ले पाई हो, लेकिन असली घटनाओं के ‘फ़िल्मी स्पिन’ ने पर्दे पर इतिहास रच दिया।

बात हो रही है आदित्य धर की, जिनकी ‘धुरंधर द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान बना रही है।

मैंने यह हिंदी फिल्म लंदन के एक सिनेमाघर में देखी हाउसफुल। हिंदी फिल्मों के लिए वहां ऐसा क्रेज़ आम नहीं है। लेकिन सबसे अलग था वह पल, जब क्रेडिट रोल में आदित्य धर का नाम आते ही पूरे हॉल में तालियां गूंज उठीं।

यह इसलिए खास था क्योंकि भारतीय कमर्शियल सिनेमा में तालियां आमतौर पर स्टार्स के लिए बजती हैं, निर्देशक के लिए नहीं।

गीतकार से शुरुआत, पहचान की तलाश

आदित्य धर का पहला काम एक गीतकार के रूप में सामने आया। यश राज फिल्म्स की फिल्म ‘काबुल एक्सप्रेस’ के लिए लिखा उनका गीत ‘काबुल फ़िज़ा’ काफी लोकप्रिय हुआ।

इसी दौरान उन्होंने शॉर्ट फिल्म ‘बूंद’ की स्क्रिप्ट और डायलॉग लिखे, जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बावजूद कई प्रोजेक्ट्स में काम करने के बाद भी उन्हें क्रेडिट नहीं मिला और यही अनुभव उनके लिए निराशा का कारण बना।

प्रियदर्शन के साथ सीख, लेकिन संघर्ष जारी

2010 में उन्होंने प्रियदर्शन के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम शुरू किया। फिल्म ‘आक्रोश’ के डायलॉग लिखने का क्रेडिट भी उन्हें मिला।

प्रियदर्शन ने उनकी भाषा पर पकड़ को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया।

लेकिन तीन साल बाद जब आदित्य खुद निर्देशन करना चाहते थे, तो फिर संघर्ष शुरू हुआ—कई प्रोजेक्ट्स बने, लेकिन कोई फिल्म फ्लोर पर नहीं जा सकी।

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‘रात बाकी’ और किस्मत का झटका

2016 में करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शन के साथ उन्हें ‘रात बाकी’ डायरेक्ट करने का मौका मिला। फिल्म में कटरीना कैफ और फवाद खान थे।

लेकिन उरी हमले के बाद बदले माहौल में फिल्म रुक गई और अंततः बंद हो गई।

आदित्य धर फिल्म सफर/Aditya Dhar film Safar

असफलता से जन्मी ‘उरी’

18 सितंबर 2016 के उरी हमले ने आदित्य के करियर की दिशा बदल दी। उसी घटना ने उन्हें Uri: The Surgical Strike बनाने की प्रेरणा दी।

सिर्फ 12 दिनों में लिखी गई यह फिल्म 2019 की बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी। ‘हाउज़ द जोश?’ जैसे डायलॉग देशभर में गूंजे।

फिल्म को चार राष्ट्रीय पुरस्कार मिले और आदित्य धर बड़े निर्देशकों की कतार में शामिल हो गए।

आदित्य धर फिल्म सफर/Aditya Dhar film Safar

‘धुरंधर’—जोखिम, जुनून और रिकॉर्ड

इसके बाद उन्होंने ‘धुरंधर’ जैसी महत्वाकांक्षी फिल्म बनाई, जिसमें उन्होंने रणवीर सिंह को कास्ट किया—जो उस समय फ्लॉप फिल्मों के दौर से गुजर रहे थे।

फिल्म की कहानी इतनी बड़ी थी कि इसे दो हिस्सों में रिलीज़ करने का फैसला लिया गया। बड़ा जोखिम था, लेकिन यह दांव सफल रहा।

‘धुरंधर-2’ अब हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल होने की राह पर है।

प्रोपेगेंडा या पॉलिटिकल थ्रिलर?

आदित्य धर की फिल्मों पर प्रोपेगेंडा होने के आरोप भी लगे चाहे ‘उरी’ हो, ‘आर्टिकल 370’ या ‘धुरंधर’।

लेकिन यही बहस इस सिनेमा की खासियत भी है। जैसे जेम्स बॉन्ड या मिशन इम्पॉसिबल में देशभक्ति और राजनीति होती है, वैसे ही भारतीय फिल्मों में भी अब यह परत दिखने लगी है।

फिल्म समीक्षक मयंक शेखर के अनुसार, आदित्य धर की ताकत है हकीकत और फिक्शन का ऐसा मेल, जो कहानी को विश्वसनीय बनाता है।

सफलता के साथ जिम्मेदारी

आदित्य धर ने असल घटनाओं से प्रेरित पॉलिटिकल थ्रिलर्स का एक नया फॉर्मूला तैयार किया है। उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी B62 स्टूडियोज़ भी शुरू की।

लेकिन उनकी फिल्मों पर यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या वे तथ्यों और कल्पना के बीच की सीमा का सम्मान करती हैं?

क्योंकि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं समाज का आईना भी है।

क्रिकेट के मैदान पर स्पिनर बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन आदित्य धर ने उसी ‘स्पिन’ को सिनेमा में बदलकर इतिहास रच दिया।

आज उनके नाम पर बजती तालियां सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस सफर की गूंज हैं जो संघर्ष, असफलता और जुनून से होकर गुजरा है। और शायद यही उनकी असली कहानी है सपना बदला, लेकिन जिद नहीं।

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– सारिका असाटी

 

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