Wednesday, March 25, 2026
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नवरात्रि का महत्व/importance of navratri

नवरात्रि का महत्व/importance of navratri
नवरात्रि का महत्व/importance of navratri

नवरात्रि अर्थात्‌दिव्य नौ रातें, गहरे विश्राम और शरीर तथा मन को पुनः ऊर्जावान बनाने का उत्तम समय होता है। इसमें प्रत्येक दिन देवी माँ के नौ रूपों में से एक रूप को समर्पित किया जाता है। अंतिम दिन, अर्थात् दसवें दिन, जिसे विजयदशमी कहा जाता है, को लोक मान्यता के अनुसार बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रूप में मनाया जाता है, परंतु वास्तव में इसका गहरा अर्थ है, सतोगुण की अन्य गुणों पर विजय, अर्थात्‌उसी एक चेतना का प्रकट होना।

रात्रि शब्द का अर्थ है, वह जो हमें तीनों प्रकार की ताप से राहत या गहरा विश्राम देती है। ताप का अर्थ है तीन प्रकार की ज्वाला/अग्नि या तीन परेशानियाँ- स्थूल, सूक्ष्म और करणीय। तीन प्रकार की परेशानियाँ हैं : आदि भौतिक – सांसारिक परेशानियाँ,  आदि दैविक – लौकिक देवदूतों अथवा देवताओं के स्तर की परेशानियाँ और तीसरी आत्मा के स्तर की परेशानियाँ। नवरात्रि का समय गहन विश्राम का समय होता है, जो हमें इन तीनों परेशानियों से मुक्त कर सकता है, इसलिए यह समय प्रार्थना और पुनः ऊर्जावान बनने का समय होता है।

नवरात्रि में आपका मन दैवीय चेतना में डूबा होना चाहिए। एक शिशु को भी जन्म लेने में नौ महीने का समय लग जाता है। उसी प्रकार यह नौ दिन भी वैसे हैं, जैसे हम माँ के गर्भ से पुनः बाहर आ रहे हों, एक नए जन्म का समय। इन नौ दिन और रातों में हमें अपने भीतर जाकर अपने मूल का स्मरण करना चाहिए। स्वयं से यह प्रश्न करो, “मेरा जन्म कैसे हुआ?”, “मेरा मूल स्रोत क्या है?” आपको अपनी चेतना पर चिंतन करना चाहिए और इन नौ दिनों को नौ महीनों की भांति देखना चाहिए।

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नव दुर्गा: दुर्गा के नौ रूपों का महत्व

पहला दिन – शैलपुत्री: दुर्गा का प्रथम रूप

शैलपुत्री का उदय शैल से हुआ है, जिसका अर्थ होता है, वह जो अद्वितीय है, वह जो शैलपुत्री के चरम शिखर के अनुभव से उत्पन्न हो।

दूसरा दिन – ब्रह्मचारिणी: द्वितीय रूप

ब्रह्म का अर्थ है, अनंत और ब्रह्मचारिणी वह है, जो अनंतता में विचरण करती है।

इसका एक अन्य अर्थ है देवी माँ का कुंवारा पक्ष – यह ऊर्जा पवित्र, अक्षत है, जो सूर्य की रश्मियों की भाँति, वैसे तो प्राचीन है किंतु हर पल निर्मल और नूतन भी है। दुर्गा के द्वितीय रूप में यह नयापन दर्शाया गया है।

तीसरा दिन – चन्द्रघंटा: तृतीय रूप

चन्द्रघंटा का अर्थ है, चन्द्र, चाँद या वह जिसका संबंध मन से हो, वह जो मन को आनंदित करता है, वह जो सौन्दर्य का साकार रूप है। जहाँ कहीं भी आपको कुछ भी सुंदर दिखता या लगता है तो वह  देवी माँ की ऊर्जा के कारण ही है।

चौथा दिन – कूष्मांड: चतुर्थ रूप

कूष्मांड का अर्थ है ऊर्जा का गोला, प्राण शक्ति। जब भी आप प्रचण्ड ऊर्जा या प्राण शक्ति अनुभव करते हो, तो जान लो कि यह देवी माँ, दुर्गा का ही एक रूप है।

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पाँचवा दिन – स्कंदमाता: पंचम रूप

स्कंदमाता, माँ जैसी ऊर्जा है, वह आपकी अपनी माँ जैसी है। स्कंदमाता अर्थात्  ज्ञान के सभी छ: दर्शन शास्त्रों – न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, वेदान्त और उत्तर मीमांसा; वेदों के छ: अँग या शाखाएं या षड् दर्शन। ज्योतिष शास्त्र, संगीत, छन्द स्वरविज्ञान और बहुत से अन्य दर्शनशास्त्र, कला और विज्ञान, ज्ञान, के 64  विभिन्न विषय ये सब इसमें सम्मिलित हैं। स्कंदमाता इस सब ज्ञान की माँ हैं।

छठा दिन – कात्यायनी: छठा रूप

कात्यायनी, देवी का वह रूप है, जो चेतना के साक्षी पक्ष से उदय होती है; वह चेतना जिसमें अंतर्ज्ञान की योग्यता है।

सातवाँ दिन – कालरात्रि: सप्तम् रूप

कालरात्रि घोर, घुप्प अँधेरी ऊर्जा है, वह गहरा स्याह पदार्थ जिसमें अनंत ब्रह्मांड समाया हुआ है, और जो प्रत्येक जीवात्मा को शांति देने वाला है। यदि आप प्रसन्न और सुखी महसूस करते हैं, तो यह रात्रि के आशीर्वाद के कारण ही है। कालरात्रि, देवी माँ का वह रूप है जो इस ब्रह्मांड से भी परे है और वह प्रत्येक हृदय और आत्मा को ढाढ़स बंधाता है।

आठवाँ दिन – महागौरी: अष्टम रूप

महागौरी, देवी का वह रूप है, जो अति सुंदर है, जो जीवन को गति और परम मुक्ति देती है। यह आपको परम मुक्ति देने वाली है।

नौवाँ दिन – सिद्धिदात्री: नवम् रूप

सिद्धिदात्री जीवन में पूर्णता और सिद्धियाँ लाती है। देवी माँ का आशीर्वाद जीवन में अनेक चमत्कार लाता है। हमारे लिए जो असंभव दिखता है, माँ उसको संभव करती है।

और अंतिम दिन अर्थात्‌दसवें दिन विजयदशमी होती है – नवरात्रि का समापन उत्सव से होता है और आप स्वयं को भावनात्मक, आध्यात्मिक तथा बौद्धिक स्तर पर ऊर्जावान अनुभव करते हैं।

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नवरात्रि का महत्व/importance of navratri

नवरात्रि के नौ रंग

नवरात्रि 2026 के नौ रंग सफेद, लाल, गहरा नीला, पीला, हरा, स्लेटी (ग्रे), नारंगी, मोरपंखी हरा और गुलाबी हैं।

हर साल रंग एक जैसे ही रहते हैं, लेकिन नवरात्रि के दिनों के हिसाब से इनका क्रम बदलता रहता है। नवरात्रि के रंगों की एक सूची दी गई है:

  • प्रथम दिन प्रतिपदा सफेद
  • दूसरा दिन द्वितीया लाल
  • तीसरा दिन तृतीया गहरा नीला (रॉयल ब्लू)
  • चौथा दिन चतुर्थी पीला
  • पांचवा दिन पंचमी हरा
  • छठा दिन षष्ठी स्लेटी (ग्रे)
  • सातवाँ दिन सप्तमी नारंगी
  • आठवां दिन अष्टमी मोरपंखी हरा (पीकॉक ग्रीन)
  • नौवां दिन नवमी गुलाबी

नवरात्रि का महत्व/importance of navratri

नवरात्रि के रंगों का महत्व

नवरात्रि के नौ रंगों में से प्रत्येक रंग देवी के एक विशिष्ट गुण का प्रतीक है।

  1. सफेद: सफेद रंग शांति, पवित्रता और देवी की पूजा करते समय भक्तों के हृदय में प्रार्थना का प्रतीक है।
  2. लाल: लाल रंग क्रियाशीलता और उत्साह का प्रतीक है। यह देवी के उग्र रूप का प्रतीक है।
  3. गहरा नीला (रॉयल ब्लू): गहरा नीला रंग शांति और गहरे नीले आकाश की गहराई का प्रतीक है। यह देवी के ज्ञान की गहराई का प्रतिनिधित्व करता है।
  4. पीला: पीला रंग चमक, खुशी और उत्साह का रंग है – जो देवी का गुण है।
  5. हरा: हरा रंग हर क्षेत्र में सफलता के लिए आवश्यक विकास और उर्वरता का प्रतीक है।
  6. स्लेटी: स्लेटी संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है।
  7. नारंगी: नारंगी रंग चमक और ऊर्जा का प्रतीक है।
  8. मोरपंखी हरा: मोरपंखी हरा रंग विशिष्टता और वैयक्तिकता का प्रतिनिधित्व करता है।
  9. गुलाबी: गुलाबी रंग प्रेम, स्नेह और सद्भाव का प्रतीक है।

इस वर्ष जब आप किसी समारोह में भाग लें तो इन रंग को ध्यान में रखें और हर दिन अलग अलग परिधान पहनें तथा उसके साथ अन्य आभूषण भी पहनें। नवरात्रि के रंगों के महत्व के ज्ञान के साथ, आप अपने वस्त्रों से भी अभिव्यक्ति कर सकते हैं।

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– सारिका असाटी
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