
🌎 विश्व शांति और समझ दिवस का इतिहास
(History of World Peace and Understanding Day)
23 फरवरी को विश्व शांति और समझ दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1905 में Paul Harris द्वारा स्थापित Rotary International की पहली बैठक की स्मृति में मनाया जाता है, जो Chicago में आयोजित हुई थी।
इस दिवस का उद्देश्य है—

- विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देना
- संघर्षों का समाधान बातचीत से करना
- मानवीय सेवा के माध्यम से वैश्विक सद्भाव स्थापित करना
यह दिन हमें याद दिलाता है कि युद्धों को समाप्त करने और एक सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने के लिए आपसी समझ और सहानुभूति सबसे शक्तिशाली साधन हैं।
🕊️ भारत और विश्व शांति की प्राचीन अवधारणा
(India’s Ancient Philosophy of Global Peace)
भारत में विश्व शांति का विचार अत्यंत प्राचीन है। वैदिक ऋषियों ने केवल मानव ही नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति की शांति की कामना की।
📖 यजुर्वेद का शांति पाठ
“ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:”
अर्थात—आकाश, पृथ्वी, जल, वनस्पति—सभी में शांति हो।
यह समग्र पर्यावरणीय संतुलन की अवधारणा है, जो आज के जलवायु संकट के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है।

📖 ऋग्वेद का संगठन सूक्त
“सं गच्छध्वं सं वदध्वं…”
अर्थात—साथ चलो, साथ बोलो, मन एक रखो।
यह सामाजिक एकता और सामूहिक निर्णय का संदेश देता है।
🌏 वसुधैव कुटुम्बकम्
“अयं निजः परो वेति…”
यह सिद्धांत बताता है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान “One Earth, One Family, One Future” के माध्यम से इस वैदिक विचार को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
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🧘 गांधीवादी चिंतन और अहिंसा
(Gandhian Philosophy and Non-Violence)
Mahatma Gandhi ने वैदिक और पौराणिक मूल्यों को अहिंसा के रूप में पुनर्जीवित किया।
उन्होंने शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि न्याय और करुणा की उपस्थिति बताया।
गांधी पर Gautama Buddha और Mahavira के विचारों का गहरा प्रभाव था।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारत मानसिक और शारीरिक संतुलन का मार्ग दिखा रहा है—जो विश्व शांति की नींव है।
🌐 आधुनिक भारत की शांति कूटनीति
(India’s Peace Diplomacy in 2026)
भारत की विदेश नीति वैदिक आदर्शवाद और आधुनिक यथार्थवाद का मिश्रण है।
प्रमुख आधार:
- वसुधैव कुटुम्बकम्
- पंचशील सिद्धांत (1954)
- संवाद आधारित समाधान
- 5S मॉडल – सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा, संस्कृति
आज जब विश्व रूस-यूक्रेन और मध्य-पूर्व जैसे संघर्षों से जूझ रहा है, भारत संवाद और कूटनीति का आह्वान करता है।
भारत स्वयं को ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में प्रस्तुत करता है और विकासशील देशों तथा विकसित राष्ट्रों के बीच सेतु की भूमिका निभाता है।

📜 उपनिषद और पुराणों का शांति संदेश
(Message of Peace in Upanishads and Puranas)
- ईशोपनिषद: सबमें एक ही तत्व देखने का संदेश
- श्वेताश्वतर उपनिषद: “अमृतस्य पुत्राः”—सभी मानव एक ही चेतना से उत्पन्न
- पद्म पुराण: “आत्मनः प्रतिकूलानि…” – जो व्यवहार स्वयं के लिए अनुचित लगे, वह दूसरों के साथ न करें
- “लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु” – समस्त विश्व के कल्याण की कामना
यह विचारधारा बताती है कि शांति केवल राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक चेतना है।
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🤝 विश्व शांति का व्यावहारिक मार्ग
(Practical Path to Global Harmony)
- अंतर-सांस्कृतिक संवाद
- सहिष्णुता और स्वीकार्यता
- मानवीय सेवा
- पर्यावरणीय संतुलन
- व्यक्तिगत शांति → सामाजिक शांति → वैश्विक शांति
✨ निष्कर्ष
विश्व शांति केवल एक कूटनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि एक मानवीय और आध्यात्मिक आवश्यकता है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत—वेद, उपनिषद, पुराण और गांधीवादी चिंतन—आज भी विश्व को यह संदेश देती है कि सच्ची शांति आपसी समझ, करुणा और एकता से ही संभव है।
जब हम “मित्रस्य चक्षुषा” अर्थात मित्र की दृष्टि से संसार को देखेंगे, तभी वैश्विक सद्भाव संभव होगा।
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