
परिचय (Introduction)
“मैं तैनू फ़िर मिलांगी” – यह शब्द न केवल अमृता प्रीतम की एक कविता का हिस्सा हैं, बल्कि एक वायदा भी हैं, जो उन्होंने अपने जीवन के सबसे अलौकिक प्रेमी इमरोज से किया था। अमृता और इमरोज की प्रेम कहानी एक ऐसी कथा है, जो शब्दों और चित्रों की सीमाओं से बाहर, एक अज्ञेय प्रेम की गहराईयों में समाई हुई है। यह प्रेमकथा न केवल दिल को छूने वाली है, बल्कि जीवन और मृत्यु के पार भी इसके प्रेम की गूंज सदियों तक सुनाई देती रहेगी।
22 दिसंबर 2023 को जब इमरोज ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो उनका यह यात्रा पूरी हुई, लेकिन उनकी और अमृता की प्रेम कहानी को शब्दों और चित्रों में जीवित रखा जाएगा। उनका प्यार, जो कभी मात्र एक चित्रकला और कविता के माध्यम से व्यक्त होता था, अब इतिहास का एक अमिट हिस्सा बन चुका है।
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अमृता और इमरोज की मुलाकात (The First Meeting of Amrita and Imroz)
अमृता प्रीतम और इमरोज की मुलाकात एक साधारण वजह से हुई थी – अमृता की किताब आखिरी खत के कवर डिज़ाइन के लिए। जब अमृता ने अपने एक जानकार से किताब के कवर के लिए मदद मांगी, तो उस जानकार ने इमरोज का नाम सुझाया। इसके बाद जब इमरोज ने अमृता से पहली बार मुलाकात की, तो उनकी आत्मीयता और जुड़ाव ने एक नए अध्याय की शुरुआत की।
इस मुलाकात के बाद दोनों के रिश्ते में धीरे-धीरे एक गहरी दोस्ती और फिर प्यार का जन्म हुआ। इमरोज ने अमृता को सिर्फ एक प्रेमी के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक साथी, एक प्रेरणा, और एक जीवनसंगिनी के रूप में अपनाया। उनकी प्रेम कहानी ने पारंपरिक रिश्तों की परिभाषाओं को पीछे छोड़ दिया।
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अमृता का साहिर से प्यार (Amrita’s Love for Sahir)
अमृता प्रीतम की ज़िंदगी में तीन बड़े नाम रहे – पहला था प्रीतम सिंह, जिनसे उनका विवाह हुआ, दूसरा था साहिर लुधियानवी, जिनके साथ उनका गहरा प्रेम संबंध था और तीसरा इमरोज, जिनसे उनका जीवन और प्रेम का रिश्ता जन्मों तक था।
साहिर के साथ उनका प्रेम एक कठिन और जटिल कहानी थी, जिसमें न केवल उनकी भावनाओं की गहराई, बल्कि समाज की स्वीकृति और अस्वीकार्यता का भी सामना करना पड़ा। अमृता ने अपने प्रेम पत्रों और कविताओं में साहिर को अपनी आत्मा का हिस्सा माना, लेकिन उनके दिल में इमरोज के लिए भी एक अजीब सी जगह थी। यह एक ऐसा त्रिकोण था, जिसमें साहिर के साथ उनका अफेयर पूरी तरह से अव्यक्त था, जबकि इमरोज के लिए उनका प्यार पूरी तरह से व्यावहारिक और गहरे आत्मीयता से जुड़ा हुआ था।
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इमरोज और अमृता का अनकहा प्यार (Imroz and Amrita’s Unspoken Love)
अमृता और इमरोज का रिश्ता एक रहस्यमय और अलौकिक था। दोनों एक ही घर में रहते हुए भी एक-दूसरे से शब्दों से कम, दिल से ज्यादा बात करते थे। इमरोज ने कभी भी अपनी भावनाओं का प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन उनका हर कार्य, उनकी हर छोटी से छोटी बात यह साबित करती थी कि वह अमृता के लिए अपनी पूरी पहचान और आत्मा को समर्पित कर चुके थे।
इमरोज अमृता की कविताओं के लिए सबसे बड़ा प्रशंसक थे। वह दिन-रात अमृता के लेखन के लिए सहयोग करते थे, लेकिन कभी भी अपनी भावनाओं का उल्लंघन नहीं करते थे। उन्होंने खुद को अमृता के प्यार में इस तरह से खो दिया कि उनकी व्यक्तिगत पहचान को कहीं खो दिया था। अमृता के साथ बिताए गए हर पल को वह अपनी सबसे बड़ी खुशी मानते थे।

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लिव-इन रिलेशनशिप और समाज की स्वीकार्यता (Live-in Relationship and Societal Acceptance)
अमृता और इमरोज का रिश्ता लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में था, लेकिन यह रिश्ता किसी साधारण रिश्ते से कहीं अधिक था। 40 साल तक दोनों ने एक ही घर में एक-दूसरे के साथ बिताए, लेकिन समाज ने हमेशा उनके रिश्ते को संदेह की नजर से देखा। इमरोज ने अमृता के लिए कभी भी अपनी स्वीकृति की मांग नहीं की, और न ही उन्होंने कभी इसे औपचारिक नाम देने की कोशिश की।
जब अमृता को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया, तो इमरोज उन्हें संसद तक लेकर जाते थे, लेकिन कभी भी किसी को यह नहीं पता चलता था कि वह अमृता के प्रेमी हैं। लोग हमेशा यह मानते थे कि इमरोज बस उनके ड्राइवर हैं। लेकिन इमरोज ने कभी भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। वह बस अमृता के साथ अपने रिश्ते को पूरी तरह से समर्पित रहते थे।
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इमरोज की मृत्यु और अमृता से पुनर्मिलन (Imroz’s Death and Reunion with Amrita)
22 दिसंबर 2023 को जब इमरोज का निधन हुआ, तो उनकी और अमृता की प्रेमकथा का एक अध्याय समाप्त हुआ। लेकिन जैसा कि अमृता ने अपनी कविता में लिखा था, “मैं तैनू फ़िर मिलांगी”, वह यह वायदा करती हैं कि एक दिन वह फिर मिलेंगे।
उनकी प्रेम कहानी अब शारीरिक रूप से समाप्त हो चुकी है, लेकिन अमृता और इमरोज की यह अनमोल प्रेमकथा हमेशा जीवित रहेगी। शब्दों और चित्रों के माध्यम से, वह प्रेम की एक ऐसी मिसाल बन गए हैं, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगी।

निष्कर्ष (Conclusion)
अमृता और इमरोज की प्रेम कहानी न केवल एक व्यक्तिगत यात्रा है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि प्यार में पूरी तरह से समर्पण और विश्वास कितना महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने अपने जीवन को एक साथ बिताया, लेकिन बिना किसी भी बाहरी औपचारिकता के, जैसे दो आत्माएँ एक-दूसरे के लिए बनी थीं। उनकी कहानी एक जीवनभर का वायदा और प्रेम की महानता का प्रतीक बन गई है। शब्दों और चित्रों की यह प्रेमकथा हमेशा के लिए याद रखी जाएगी, और जैसे अमृता ने कहा था, “मैं तैनू फ़िर मिलांगी”, उनका यह वायदा अब एक सच्चाई बन चुका है।
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