Wednesday, February 4, 2026
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बेटियों के अधिकार सुरक्षा/daughters rights protection

बेटियों के अधिकार सुरक्षा/daughters rights protection
बेटियों के अधिकार सुरक्षा/daughters rights protection

बेटियों को सक्षम, समृद्ध और सशक्त बनाने की शुरुआत उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताकर करनी चाहिए। हर लड़की को पता होना चाहिए कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और  शादी से जुड़े क्या अधिकार उनके पास हैं। जब बेटियां खुद अपने अधिकारों के बारे में जानेंगी तो वह कभी किसी दबाव, किसी दूसरे पर निर्भर और आत्म संश्रय में नहीं रहेंगी।

आज भी कई लड़कियां पढ़ाई, सुरक्षा, स्वास्थ्य और फैसलों के अधिकार से इसलिए वंचित रह जाती हैं, क्योंकि उन्हें यह ही नहीं पता कि कानून उनके साथ खड़ा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें याद दिलाता है कि बेटियों को दया नहीं, अधिकार चाहिए और अधिकार तभी काम आते हैं, जब उन्हें जाना जाए।

प्रत्येक वर्ष की भांति 24 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day in Hindi) मनाया जाएगा। वर्तमान में देखा जाए तो देश की बेटियां हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। एक समय ऐसा था, जब बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता था। यह स्थिति अब न के बराबर हो गई है। पहले बेटियों का बचपन में ही बाल विवाह कर दिया जाता था। बेटियों के साथ भेदभाव और उनके साथ होने वाले अत्याचारों को रोकने के खिलाफ देश की आजादी के उपरांत से भारत सरकार प्रयासरत है। भारत को आज़ादी मिले 77 साल हो रहे हैं पर आज भी लड़कियों की स्थिति घर और बाहर दोनों जगह असुरक्षा के घेरे में है।

भारत में बेटियां आज भी असुरक्षित, डरी और सहमी हुई हैं उनके साथ कुछ भी गलत होने की स्थिति में न्याय मिलना अभी भी कठिन बना हुआ है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के नारे आज भी अधूरे और सहमे हुए सुनाई देते हैं। बटियों को शतप्रतिशत सुरक्षा उनका परिवार, समाज, सरकार और प्रशासन नहीं बल्कि परमात्मा ही दे सकता है। इस लेख में आगे पढ़ें परमात्मा स्वरूप संत रामपाल जी महाराज जी किस तरह बना रहे हैं धरती को स्वर्ग समान जहां सभी माताएं, बहनें, बेटियां और बालिकाएं सदा महफूज़ जीवन जी सकेंगी।

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बेटियों को देश का सफल नागरिक बनाने के लिए कई योजनाएं और कानून लागू किए गए। इसी लक्ष्य को साध कर सरकार ने राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाना शुरु किया था। देश की बेटियों को सशक्त बनाने के लिए और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस मुख्य दिवस को 24 जनवरी को मनाने का यही कारण है।

भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भेदभाव खत्म करना और उन्हें उनके कानूनी, सामाजिक और मौलिक अधिकारों की जानकारी देना है। आइए जानते हैं बेटियों मिले उन आठ अधिकारों के बारे में, जो उन्हें सशक्त बनाते हैं।

ये हैं बेटियों के 8 सबसे जरूरी अधिकार, जो हर लड़की को पता होने चाहिए

बेटियों के अधिकार सुरक्षा/daughters rights protection
शिक्षा का अधिकार

  • हर लड़की को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।
  • कोई भी परिवार बेटी को पढ़ाई से नहीं रोक सकता। 6 से 14 साल की उम्र तक शिक्षा कानूनन जरूरी है।

जन्म और पहचान का अधिकार

  • हर लड़की को जन्म के साथ जन्म प्रमाण पत्र और पहचान पाने का अधिकार है।
  • बिना पहचान के वह सरकारी योजनाओं और सुरक्षा से वंचित रह जाती है।

बराबरी का अधिकार

  • कानून की नजर में बेटा और बेटी पूरी तरह बराबर हैं, चाहे संपत्ति हो, अवसर हों या सम्मान हो।
  • लड़कियां समान अवसर, समान शिक्षा और कार्य स्थल पर समान वेतन के अधिकार के लिए आवाज उठा सकती है।

बाल विवाह से सुरक्षा का अधिकार

  • 18 साल से पहले शादी अपराध है।
  • अगर किसी लड़की पर जबरन शादी का दबाव डाला जाए, तो वह पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या महिला हेल्पलाइन 181 पर शिकायत कर सकती है।

स्वास्थ्य और पोषण का अधिकार

  • हर लड़की को सही पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाएं पाने का अधिकार है।
  • सरकार की कई योजनाएं खास तौर पर किशोरियों के लिए बनाई गई हैं।

सुरक्षा और सम्मान का अधिकार

  • छेड़छाड़, हिंसा, शोषण या दुर्व्यवहार के खिलाफ कानून बेटी के साथ है।
  • लड़की की सहमति के बिना कुछ भी गलत है, ये बात कानून साफ़ कहता है।

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संपत्ति में बराबर का अधिकार

  • हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार बेटी को पिता की संपत्ति में बराबर का हक मिलता है, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित।

बेटियों के अधिकार सुरक्षा/daughters rights protection

अपनी जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार

  • पढ़ाई, करियर, शादी इन फैसलों में लड़की की राय सबसे अहम है।
  • किसी भी तरह का दबाव कानूनन गलत है।

भारत में यूनिसेफ बच्चों, किशोरियों और गर्भवती स्त्रियों के लिए कार्य करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था भी है। भारत में बालिकाओं की स्थिति को मजबूत करने और उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की किलकारी योजना में यूनिसेफ का भी सहयोग रहा है। इस योजना के तहत कई किशोरियों को अपने सपने पूरे करने और करियर बनाने का मौका मिला। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी यूनिसेफ कार्य कर रहा, साथ ही बाल विवाह जैसी कुरीति को खत्म करने की दिशा में जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।

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– सारिका असाटी

 

 

 

 

 

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