
नया साल आते ही हर घर में नई उम्मीदें जन्म लेती हैं। पैरेंट्स के मन में भी यही ख्याल होता है कि इस साल बच्चों को और बेहतर कैसे बनाया जाए, उनकी आदतें कैसे सुधारी जाएं और उनकी सोच को कैसे पॉजिटिव दिशा दी जाए। अक्सर हम बच्चों के लिए नए साल पर नई किताबें, नए कपड़े या नए गैजेट तो ले आते हैं, लेकिन उनकी परवरिश से जुड़ा कोई संकल्प लेना भूल जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि बच्चों की असली ग्रोथ बाहरी चीजों से नहीं बल्कि पैरेंट्स के व्यवहार, सोच और रोजमर्रा की आदतों से होती है। नया साल पैरेंट्स के लिए खुद को सुधारने और बच्चों के सामने एक बेहतर उदाहरण पेश करने का सबसे अच्छा मौका होता है। अगर पैरेंट्स नए साल पर कुछ छोटे लेकिन असरदार संकल्प ले लें तो बच्चों की आदतें ही नहीं, उनकी सोच और आत्मविश्वास में भी बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।
बच्चों के सामने खुद एक उदाहरण बनें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे रोज देखते हैं। अगर पैरेंट्स चाहते हैं कि बच्चे समय पर उठें, मोबाइल कम चलाएं, साफ सफाई रखें और दूसरों से अच्छे से बात करें, तो सबसे पहले उन्हें खुद ऐसा करना होगा। नया साल पैरेंट्स के लिए यह तय करने का समय है कि वे बच्चों के सामने जैसा व्यवहार दिखाएंगे, बच्चे भी वही अपनाएंगे। चिल्लाना, गुस्सा करना या हर बात पर डांटना बच्चों की सोच पर नेगेटिव असर डालता है। शांत रहकर बात करना और समझाना बच्चों को ज्यादा गहराई से सिखाता है।
बच्चों के साथ समय बिताने का संकल्प लें
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे ज्यादा कमी समय की ही होती है। पैरेंट्स अक्सर बच्चों को सब कुछ देना चाहते हैं लेकिन समय नहीं दे पाते। नए साल पर यह संकल्प लें कि रोज कुछ वक्त सिर्फ बच्चों के लिए निकालेंगे। यह वक्त बहुत ज्यादा होना जरूरी नहीं, लेकिन उस समय पूरा ध्यान बच्चों पर होना चाहिए। उनके दिन के बारे में पूछना, उनकी बात सुनना और उनकी भावनाओं को समझना बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।
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डांट नहीं संवाद को बनाएं आदत
कई बार बच्चे गलती करते हैं और पैरेंट्स का पहला रिएक्शन डांटना होता है। नया साल यह सीख देता है कि हर गलती सिखाने का मौका होती है। बच्चों से बात करके उन्हें समझाना उनकी सोच को बेहतर बनाता है। संवाद से बच्चे यह सीखते हैं कि हर समस्या का हल बातचीत से निकाला जा सकता है। इससे उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है और डर भी कम होता है।
बच्चों में जिम्मेदारी की भावना जगाएं
नया साल बच्चों को जिम्मेदार बनाने का भी अच्छा समय है। पैरेंट्स छोटे छोटे काम बच्चों को सौंप सकते हैं। जैसे अपना बैग संभालना, खिलौने सही जगह रखना या घर के किसी छोटे काम में मदद करना। इससे बच्चों में जिम्मेदारी की भावना आती है और वे खुद को परिवार का अहम हिस्सा महसूस करते हैं। यह आदत आगे चलकर उनकी पर्सनालिटी को मजबूत बनाती है।
बच्चों की तुलना करना बंद करें
कई पैरेंट्स अनजाने में बच्चों की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। यह आदत बच्चों के मन में हीन भावना पैदा करती है। नए साल पर यह संकल्प लेना जरूरी है कि बच्चों की तुलना किसी और से नहीं करेंगे। हर बच्चा अलग होता है और उसकी खूबियां भी अलग होती हैं। बच्चों को उनकी ताकत पहचानने में मदद करें न कि उनकी कमियों पर बार बार ध्यान दें।
स्क्रीन टाइम को लेकर संतुलन बनाएं
आज के समय में बच्चों का मोबाइल और टीवी से दूर रहना मुश्किल है। लेकिन नया साल पैरेंट्स को यह सिखाता है कि रोक लगाने से ज्यादा जरूरी है संतुलन बनाना। बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम तय करें और खुद भी उसका पालन करें। खाली समय में बच्चों को किताबें पढ़ने, बाहर खेलने या कोई नया शौक अपनाने के लिए प्रेरित करें। इससे उनकी सोच क्रिएटिव बनेगी।
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बच्चों की भावनाओं को समझें
बच्चे भी बड़े लोगों की तरह खुश, उदास और परेशान होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे अपनी भावनाएं सही तरीके से जाहिर नहीं कर पाते। नए साल पर पैरेंट्स यह संकल्प लें कि बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करेंगे। अगर बच्चा चुप है या अलग व्यवहार कर रहा है तो उसे डांटने की बजाय कारण जानने की कोशिश करें। इससे बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा महसूस होती है।
पॉजिटिव माहौल बनाना भी पैरेंटिंग का हिस्सा
घर का माहौल बच्चों की सोच को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। नया साल यह मौका देता है कि घर में पॉजिटिव बातचीत, हंसी मजाक और अपनापन बढ़ाया जाए। आपस में झगड़ा, शिकायत और नेगेटिव बातें बच्चों के मन पर गहरा असर डालती हैं। इसलिए घर को ऐसा स्थान बनाएं जहां बच्चा खुद को सुरक्षित और खुश महसूस करे।
छोटे संकल्प, बड़ा बदलाव
पैरेंटिंग में बहुत बड़े और मुश्किल नियम बनाने की जरूरत नहीं होती। छोटे छोटे संकल्प ही बच्चों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। नया साल इसी बात का संदेश देता है कि अगर पैरेंट्स खुद में थोड़ा बदलाव लाएं तो बच्चों की आदतें और सोच अपने आप बेहतर होने लगती हैं।
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