
3 जनवरी 2026, पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाला माघ स्नान और कल्पवास तीर्थराज प्रयागराज में विशेष पुण्यदायी माना गया है। स्नान, दान, व्रत और पूजा से मोक्ष, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की मान्यता है। पौष पूर्णिमा पर दान के साथ विशेष उपाय करने से चन्द्रमा का बल भी प्राप्त होता है।
पौष से ही माघ मास के पवित्र स्नान का शुभारम्भ होता है। माघ मास में संगम तट पर लोग एक महीने का कल्पवास करते हैं। सौ हजार गायों का दान करने का जो फल होता है वही फल तीर्थराज प्रयाग में माघ मास में तीस दिन (एक मास) स्नान करने का होता है। पौष पूर्णिमा के दिन सूर्योदय के पूर्व स्नानादि करके भगवान मधुसूदन की एवं उसके पश्चात ब्राह्मणों को भोजन एवं आराधना, यथाशक्ति दान देने का विधान है, सायंकाल सत्य नारायण भगवान की कथा भी होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार जो इस स्नान को करता है वह देव-विमान में बैठकर विहार करने के योग्य हो जाता है। इस स्नान का पुण्य अर्जित करने वाले पुण्यात्मा स्वर्ग में विहार करते हैं, ऐसी हिन्दुओं की धार्मिक मान्यताएं हैं। संगम के पवित्र जल में प्राणदायी शक्ति विद्यमान है। पौष पूर्णिमा पर व्रत करने वालों को इस दिन प्रातःकाल नदी आदि में स्नान करके देवताओं का पूजन एवं पितृों का तपृण करना चाहिए, सफेद चन्दन, चावल, सफेद फूल, धूप-दीप, सफेद वस्त्र आदि से चन्द्रमा का पूजन करें।
स्नान के साथ दान का विशेष महत्व–
पौष पूर्णिमा से प्रारम्भ कर माघ में स्नान के साथ दान का विशेष महत्व है। मनोवांछित फल की कामना रखने वालों को अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। जाड़ा होने के कारण कंबल आदि ऊनी वस्त्रों का दान इस समय विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। जो लोग पूरे महीने दान न कर पाएं वे कम से कम पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन ही दान करके अपना लोक-परलोक संवार सकते हैं। माघ मास में स्नान, दान, उपवास व भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी बताई गई है। महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित है
माघ मास में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार अन्य तीर्थों का समागम होता है, अतः जो नियमपूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हुए माघमास में प्रयाग में स्नान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाता है।
पौष पूर्णिमा पर बढ़ाएं चन्द्र बल–
जिनके उपर जन्मकुण्डली में चन्द्रमा की महादशा चल रही हो अथवा जिन्हें मानसिक उलझनें अधिक रहती हों, उन्हें नौ रत्ती का मोती दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी में जड़वाकर प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर पौष पूर्णिमा के दिन अवश्य धारण करना चाहिए। विशेष लाभ के लिए हाथ की अपेक्षा गले में अर्द्धचन्द्राकार रूपी लॉकेट में मोती जड़वाकर धारण करें।
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माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां
माघ मास को स्नान और दान के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। हालांकि पूरे माघ महीने में संगम स्नान का विशेष महत्व रहता है, लेकिन माघ मेले के दौरान कुछ खास तिथियां ऐसी होती हैं, जिन पर स्नान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन तिथियों पर किया गया स्नान कई गुना फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 के माघ मेले में कुल छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है।
माघ मेले का पहला मुख्य स्नान पौष पूर्णिमा के दिन 3 जनवरी 2026 को होगा। इसके बाद दूसरा प्रमुख स्नान मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी 2026 को किया जाएगा। तीसरा मुख्य स्नान मौनी अमावस्या को 18 जनवरी 2026 के दिन पड़ेगा, जिसे सबसे महत्वपूर्ण स्नानों में से एक माना जाता है। चौथा स्नान बसंत पंचमी के पावन पर्व पर 23 जनवरी 2026 को होगा। पांचवां प्रमुख स्नान माघी पूर्णिमा के दिन 1 फरवरी 2026 को किया जाएगा। वहीं माघ मेले का अंतिम और छठा मुख्य स्नान महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी 2026 को संपन्न होगा।

मौनी अमावस्या क्यों है सबसे प्रमुख स्नान
माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या को सबसे शुभ और विशेष स्नान का दिन माना जाता है। इस दिन संगम तट पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और पवित्र जल में डुबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यह दिन इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसे मौन व्रत और आत्मचिंतन के साथ मनाने की परंपरा है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का स्नान 18 जनवरी को संपन्न होगा, और इसे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण स्नान माना जाता है।
माघ मेला 2026 में स्नान के लिए शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक क्रिया को करने के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। स्नान और दान-धर्म के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम माना जाता है। अगर आप माघ मेले में स्नान करने जा रहे हैं, तो ब्रह्म मुहूर्त का समय चुनना आपके लिए अधिक फलदायी रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे तक का समय होता है। इस दौरान स्नान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है। इसलिए कोशिश करें कि माघ मेले के दौरान अपने स्नान का समय इसी मुहूर्त में रखें, ताकि आपका पुण्य अधिकतम हो सके।
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