Thursday, March 12, 2026
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जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919/Jallianwala Bagh Massacre 1919

 

जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919/Jallianwala Bagh Massacre 1919
जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919/Jallianwala Bagh Massacre 1919

जलियांवाला बाग हत्याकांड / Jallianwala Bagh Massacre

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में वैशाखी मेले के दौरान ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर ने निहत्थे भारतीयों पर बिना चेतावनी गोली चलवाई, जो स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़ बना। लगभग 10,000-20,000 लोग शांतिपूर्ण सभा व मेले में जुटे थे; डायर के 50 सैनिकों ने 10 मिनट तक 1,650 राउंड गोलियाँ चलाईं। यह घटना रॉलेट एक्ट के विरोध व डॉ. सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी से उपजी।

घटना की पृष्ठभूमि / Historical Background

प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश भारत में आर्थिक संकट, महंगाई व 1918 फ्लू महामारी ने असंतोष बढ़ाया। रॉलेट एक्ट (1919) ने युद्धकालीन रक्षा कानूनों को शांतिकाल में बढ़ा दिया और बिना मुकदमे गिरफ्तारी की अनुमति दे दी। महात्मा गांधी के सत्याग्रह ने विरोध तेज किया; पंजाब में घदार आंदोलन व क्रांतिकारी गतिविधियाँ चिंता बढ़ाईं। 10 अप्रैल को सत्यपाल व किचलू गिरफ्तार हो गए; जिससे दंगे भड़क गए। ब्रिटिश बैंक जले, यूरोपीय मारे गए। माइकल ओ’डायर (पंजाब लेफ्टिनेंट गवर्नर) ने मार्शल लॉ लगा दिया। हंसराज ने 12 अप्रैल को सभा की घोषणा की।

वैशाखी दिवस व सभा / Baisakhi Gathering

13 अप्रैल वैशाखी पर्व था; किसान, व्यापारी मेले से बाग पहुँचे। बाग 6-7 एकड़ का था जो ऊँची दीवारों से घिरा था और जिसमें 5 संकरे द्वार थे। मुख्य द्वार को सैनिकों ने घेर लिया। सुबह 9 बजे डायर ने कर्फ्यू व सभाओं पर प्रतिबंध घोषित किया, किंतु सूचना सीमित रही। दोपहर 4:30 बजे सभा शुरू हुई। हंसराज ने सैनिकों के आने पर लोगोव को शांत रहने को कहा। एयरप्लेन से देखी गई भीड़ की अनुमानित संख्या लगभग 6,000-20,000 थी।

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जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919/Jallianwala Bagh Massacre 1919

नरसंहार का क्रूर विवरण / Massacre Details

डायर 50 सिख व गोरखा सैनिकों (ली-एनफील्ड राइफल्स) व 2 मशीनगन वाली आर्मर्ड कारों से वहाँ पहुँचा, किंतु कारें संकरे द्वार से न घुस पाईं, तो डायर ने बिना चेतावनी गोली चलाने का आदेश दे दिया। घनी भीड़ को निशाना बना कर दनानद गोलियाँ निहत्थे लोगों पर चला दी गई। यह फायरिंग 10 मिनट तक चली जब तक कि गोला-बारूद समाप्त न हो गया। लोग कुएँ में कूदने लगे। बाद में कुएँ से 120 शव निकाले गए। कई लोगों ने दीवारों पर चढ़ने की नाकाम कोशिशें कीव। डायर का मकसद था विद्रोह को दबाना व भय पैदा करना।

हंसराज की संदिग्ध भूमिका / Hans Raj’s Role

अमृतसर का रहने वाला हंसराज सत्याग्रह सचिव था, जिसने सभा आयोजित की थी। वह नरसंहार से बच गया, फिर ब्रिटिश का मुख्य गवाह (अप्रूवर) बना। उसने किचलू-सत्यपाल को दोषी ठहराने में झूठी गवाही दी। कुछ इतिहासकार उसे पुलिस एजेंट मानते थे।  उसके घर पर हमला हुआ। बाद में उसे मेसोपोटामिया भेज दिया गया।

मृतक, घायल व अमृतसर पर प्रभाव / Casualties & Impact

ब्रिटिश आंकड़े: 379 मृत (337 पुरुष, 41 लड़के, 1 6-सप्ताह शिशु), 1,200 घायल; कांग्रेस अनुमान 1,500 मृत। कर्फ्यू के दौरान घायल लोग तड़पते रहे। मार्शल लॉ में स्क्रॉलिंग ऑर्डर था, जिसमें लोग कुच कुर्रिचन गली में रेंगना कर चल सकते थे। सार्वजनिक कोड़े मारने का आदेश ब्रिटिश हुकूमत ने दिया था।। गुजरांवाला दंगों में 12 मारे गए।

हंटर कमीशन की जांच / Hunter Commission Inquiry

यह कमीशन 29 अक्टूबर 1919 को गठित किया गया।  डायर ने स्वीकारा कि उसने बिना चेतावनी फायरिंग करवाई थी। बाद में रिपोर्ट (मार्च 1920) के अनुसार यह डायर ‘गंभीर भूल’ थी। उसे पद से हटा दिया गया। भारतीय सदस्यों ने ‘अमानवीय’ कहा।

जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919/Jallianwala Bagh Massacre 1919

भारतीय समाज व नेताओं की प्रतिक्रिया / Indian Reactions

टैगोर ने 30 मई 1919 को अपना सम्मान नाइटहुड लौटा दिया। गांधी ने केसर-ए-हिंद पदक त्याग दिया। विंस्टन चर्चिल ने इस घटना को ‘भयानक राक्षसी’ कहा। इसके बाद असहयोग आंदोलन (1920-22) शुरू हो गया। उधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन में ओ’डायर को गोली मार दी। उसे 31 जुलाई फाँसी पर चढ़ा दिया गया।

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विरासत व स्मारक / Legacy & Memorials

आजादी के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन किया गया 1961 में स्मारक उद्घाटन हुआ। आज भी उस जगह पर गोलियों के निशान हैं। उस शहीदी कुएँ और अमर ज्योति को देखने आज भी भारतीय वहाँ जाते हैं। 1997 में क्वीन एलिजाबेथ ने इस घटना को लेकर पछतावा जताया था। 2013 में डेविड कैमरन ने इस घटना को ‘शर्मनाक’ कहा। पर ब्रिटेन ने आज तक इस भयानक हत्याकांड के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी है।

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